मंगलवार 1 सितंबर 2026 - 14:25
मौलाना मुहम्मद सयादत नक़वी की विदाई; इल्मी और दीनी हलक़ों में गहरे रंज और अलम का इज़हार

वरिष्ठ विद्वान मौलाना सय्यद मुहम्मद सयादत नक़वी की रहलत पर मौलाना सय्यद मुनाज़िर हुसैन नक़वी ने गहरे रंज और अलम का इज़हार करते हुए कहा कि मरहूम ने अपनी ज़िन्दगी इल्म-ए-दीन की तरवीज, दीनी तालीम व तबलीग और मआरिफ़-ए-अहल-ए-बैत अलैहिमुस्सलाम की इशाअत के लिए वक्फ कर रखी थी, उनकी रहलत अहल-ए-इल्म व दीन के हलके के लिए एक नाक़ाबिल-ए-तलाफ़ी इल्मी और रूहानी नुक़सान है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जलील-उल-क़द्र आलिम-ए-दीन, मुहक़्क़िक और आलिम-ए-बाअमल, जनाब मौलाना सैयद मुहम्मद सियादत नक़वी के इन्तिक़ाल पर इल्मी और दीनी हलक़ों में गहरे रंज और अलम का इज़हार किया गया है। मरहूम का तअल्लुक़ अमरोहा की मरदुम ख़ेज़ इल्मी और दीनी सरज़मीन से था, जहाँ से बर्र-ए-सग़ीर को इल्म व फज़्ल, तक़्वा और मआरिफ़-ए-अहल-ए-बैत अलैहिमुस्सलाम के मुतअद्दिद चिराग़ नसीब हुए।

इस मौके पर ख़ादिम-ए-हरम-ए-इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम मश्हद-ए-मुक़द्दस मौलाना सैयद मुनाज़िर हुसैन नक़वी ने अपने ताज़ियती बयान में कहा कि मौलाना सैयद मुहम्मद सियादत नक़वी साहिब-ए-क़िब्ला ने अपनी ज़िन्दगी इल्म-ए-दीन की तरवीज, दीनी तालीम व तबलीग और मकतब-ए-अहल-ए-बैत अलैहिमुस्सलाम के मआरिफ़ की इशाअत के लिए वक्फ कर रखी थी। उनकी इल्मी बसीरत, दीनी ख़िदमात, इख़्लास व तक़्वा और बावक़ार तरीक़-ए-ज़िन्दगी अहल-ए-इल्म व ईमान के लिए हमेशा क़ाबिल-ए-एहतिराम रहेगा।

बयान में मज़ीद कहा गया कि मरहूम ने अपनी इल्मी और तबलीगी जद्द-ओ-जहद के ज़रिये नस्ल-ए-नौ में दीनी शुऊर बेदार करने और मआरिफ़-ए-मुहम्मद व आल-ए-मुहम्मद अलैहिमुस्सलाम को आम करने में गिराँ-क़द्र ख़िदमात अंजाम दीं, और उनकी रहलत अहल-ए-इल्म व दीन के हलके के लिए एक नाक़ाबिल-ए-तलाफ़ी इल्मी और रूहानी नुक़सान है।

मौलाना सैयद मुनाज़िर हुसैन नक़वी ने मरहूम के इन्तिक़ाल पर उनके अहल-ए-ख़ाना, पसमान्दगान, मुतअल्लिक़ीन और शागिर्दान की ख़िदमत में दिली ताज़ियत व तस्लियत पेश करते हुए इस ग़म में बराबर का शरीक होने का इज़हार किया।

उन्होंने बारगाह-ए-रब-ए-करीम में दुआ की कि अल्लाह तआला मरहूम को जवार-ए-रहमत-ए-इलाही और क़ुर्ब-ए-मुहम्मद व आल-ए-मुहम्मद अलैहिमुस्सलाम में आली मक़ाम अता फरमाए, उनकी दीनी और इल्मी ख़िदमात को शरफ़-ए-क़ुबूल बख्शे और तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम इनायत फरमाए।

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